अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी पर आसान समझ: BNSS की धारा 126 और 170 क्या हैं, SEM कोर्ट में आज क्या होगा, और नेहा बोरा को आधी रात क्यों छोड़ा गया — सब सरल हिंदी में।
Updated: October 17, 2026, 10:25 AM IST
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- अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी शुक्रवार को हुई। उन पर BNSS की धारा 126 और 170 लगाई गई हैं। आज उन्हें SEM कोर्ट में पेश किया जाएगा।
- धारा 126 का मतलब है — शांति बनाए रखने की जमानत। धारा 170 का मतलब है — निवारक गिरफ्तारी। ये दोनों अपराधी धाराएं नहीं हैं।
- AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को आधी रात को छोड़ दिया गया। उनका कहना है कि पुलिस ने उन्हें 5 घंटे तक घुमाया।
शुक्रवार शाम 5 बजे कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) का ‘लेहरा दो तिरंगा’ मार्च होना था। जगह थी — कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क। लेकिन मार्च शुरू होने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने इलाके को सील कर दिया।
पुलिस ने करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया। RAF के जवान तैनात किए गए। सेंट्रल पार्क को दो दिन के लिए बंद कर दिया गया था। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को झंडेवालान से पकड़ा गया। वे मार्च के लिए कनॉट प्लेस जा रहे थे। बाद में उनकी गिरफ्तारी दर्ज कर ली गई। आज शनिवार को उन्हें SEM कोर्ट में पेश किया जाएगा। कोर्ट का फैसला अभी नहीं आया है। यह खबर अभी विकसित हो रही है।
मार्च से एक दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। लेकिन पुलिस ने इलाके में निषेधाज्ञा लगा दी थी। यानी बिना इजाजत भीड़ जुटाना मना था। हमारी कल की खबर में इसका पूरा ब्योरा है।
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अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी क्यों हुई?
दीपके शुक्रवार को झंडेवालान से कनॉट प्लेस जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। पहले उन्हें हिरासत में लिया गया। बाद में उनकी गिरफ्तारी दर्ज की गई।
गिरफ्तारी का कारण साफ है। पुलिस का कहना है कि मार्च वाले इलाके में निषेधाज्ञा लगी थी। इसके बावजूद मार्च का ऐलान हुआ। पुलिस ने दीपके के घर पर पहले ही नोटिस चस्पा कर दिया था। नोटिस में कहा गया था कि बिना इजाजत मार्च न करें।
इसके बाद पुलिस ने निवारक कार्रवाई की। यानी गड़बड़ी होने से पहले ही कदम उठाया। दीपके पर जो धाराएं लगी हैं, वे इसी निवारक कार्रवाई का हिस्सा हैं।
लेकिन CJP का आरोप अलग है। पार्टी का कहना है कि दीपके को पहले किसी अनजान जगह ले जाया गया। ABP लाइव की खबर के मुताबिक पार्टी ने पुलिस पर “किडनैपिंग” का आरोप लगाया। पुलिस ने इस आरोप पर अभी कोई जवाब नहीं दिया है।
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BNSS क्या है? पुराने कानून से क्या फर्क?
BNSS का पूरा नाम है — भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता। यह 2023 में बना नया कानून है। इसने पुराने CrPC की जगह ली है। नया कानून 1 जुलाई 2024 से लागू हुआ।
CrPC अंग्रेजों के जमाने का कानून था। BNSS उसी का नया रूप है। इसके साथ दो और नए कानून आए — BNS (भारतीय न्याय संहिता) और BSA (भारतीय साक्ष्य अधिनियम)।
नए कानून में कई धाराओं के नंबर बदल गए हैं। लेकिन धाराओं का काम वही है। दीपके पर लगी दोनों धाराएं भी पुरानी धाराओं के नए नंबर हैं। पुराने कानून को जानने वाले लोग इन्हें पुराने नंबरों से पहचानेंगे।
धारा 126 का मतलब — शांति बनाए रखने की जमानत
धारा 126 के तहत मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने की जमानत मांग सकता है। सीधी भाषा में समझें।
मान लीजिए पुलिस को लगता है कि कोई व्यक्ति शांति भंग कर सकता है। कोई बड़ा प्रदर्शन होने वाला है। पुलिस को डर है कि वहां हंगामा होगा। तो मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति से एक लिखित वादा लेता है। वादा यह कि वह शांति नहीं बिगाड़ेगा। इस वादे को बांड कहते हैं।
बांड में एक रकम तय होती है। यह रकम मजिस्ट्रेट तय करता है। अगर वह व्यक्ति शांति बिगाड़ता है, तो यह रकम सरकार ले सकती है। अगर वह शांत रहता है, तो कुछ नहीं होता।
यह सजा नहीं है। यह एहतियात है। इसका मकसद गड़बड़ी रोकना है, सजा देना नहीं। पुराने कानून में यही धारा 107 थी। प्रदर्शन और रैलियों के मामलों में यह धारा अक्सर लगती रही है।
धारा 170 का मतलब — निवारक गिरफ्तारी
धारा 170 पुलिस को एक खास अधिकार देती है। पुलिस किसी व्यक्ति को पहले से गिरफ्तार कर सकती है। मकसद यह कि वह कोई अपराध न कर पाए।
यहां एक बात समझना जरूरी है। इस धारा में अपराध हुआ नहीं होता। पुलिस को सिर्फ आशंका होती है। आशंका यह कि वह व्यक्ति अपराध कर सकता है। इसलिए गिरफ्तारी पहले की जाती है। अपराध के बाद नहीं।
इसे निवारक गिरफ्तारी कहते हैं। निवारक का मतलब है — रोकने वाली। यानी अपराध को रोकने के लिए की गई गिरफ्तारी।
दीपके के मामले में पुलिस की आशंका यही थी। मार्च से कनॉट प्लेस में अव्यवस्था फैल सकती थी। ट्रैफिक जाम हो सकता था। इसलिए दोनों धाराएं एक साथ लगाई गईं। पुराने कानून में निवारक गिरफ्तारी की धारा 151 थी।
बांड और जमानत कैसे काम करती है?
यह सवाल कई लोगों के मन में है। बांड का मतलब क्या होता है? इसे आसान शब्दों में समझें।
बांड एक लिखित वादा होता है। व्यक्ति मजिस्ट्रेट के सामने कहता है — मैं शांति बनाए रखूंगा। इस वादे के साथ एक रकम जुड़ी होती है। रकम कितनी होगी, यह मजिस्ट्रेट तय करता है।
कुछ मामलों में जमानतदार भी चाहिए होता है। जमानतदार वह व्यक्ति है जो गारंटी देता है। वह कहता है — यह व्यक्ति शांति बनाए रखेगा। अगर वह शांति बिगाड़ता है, तो मैं जिम्मेदार हूं।
अगर व्यक्ति तय समय तक शांत रहता है, तो बांड खत्म हो जाता है। कोई सजा नहीं होती। कोई मुकदमा नहीं चलता। यही निवारक धाराओं और आपराधिक धाराओं में सबसे बड़ा फर्क है।
SEM कोर्ट क्या है? आम कोर्ट से क्या फर्क?
SEM का पूरा नाम है — स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट। यह आम कोर्ट जैसा नहीं है।
आम कोर्ट में जज होते हैं। वहां मुकदमा चलता है। गवाह आते हैं। सबूत पेश होते हैं। लेकिन SEM कोर्ट अलग है। यह कार्यपालिका का मजिस्ट्रेट होता है। इसका काम रोजमर्रा की कानून-व्यवस्था संभालना है।
जब किसी को निवारक धाराओं में पकड़ा जाता है, तो उसे SEM के सामने पेश किया जाता है। SEM तीन काम कर सकता है।
पहला — व्यक्ति से शांति का बांड लेकर छोड़ दे। दूसरा — कुछ शर्तों के साथ रिहा करे। जैसे तय समय तक उस इलाके में न जाए। तीसरा — अगर जरूरी समझे, तो कुछ समय के लिए हिरासत में रखे।
दीपके को आज SEM के सामने पेश किया जाएगा। फैसला क्या होगा, यह लिखते समय पता नहीं था। इसलिए इस खबर को विकसित खबर समझें। फैसला आते ही तस्वीर साफ होगी।
एक लाइन में समझें: BNSS = नया कानून। धारा 126 = शांति का बांड। धारा 170 = पहले से गिरफ्तारी। SEM कोर्ट = बांड पर फैसला करने वाला मजिस्ट्रेट।
नेहा बोरा को आधी रात क्यों छोड़ा गया?
AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा को मंडी हाउस से हिरासत में लिया गया था। AISA एक छात्र संगठन है। बोरा मार्च में शामिल होने जा रही थीं।
उन्हें शनिवार को आधी रात के करीब छोड़ दिया गया। PTI की खबर के मुताबिक, उनकी रिहाई दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 के तहत हुई। इस धारा के तहत पुलिस कुछ औपचारिकताएं पूरी करके व्यक्ति को छोड़ देती है। कागजी कार्रवाई होती है। फिर रिहाई हो जाती है।
लेकिन बोरा ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस उन्हें करीब 5 घंटे तक दिल्ली में घुमाती रही। एक थाने से दूसरे थाने ले जाया गया। उनके वकीलों को आधी रात तक मिलने नहीं दिया गया। उनकी दवाइयां भी नहीं दी गईं।
पुलिस का पक्ष अलग है। पुलिस कहती है कि करीब 150 लोगों को कानून-व्यवस्था के लिए हिरासत में लिया गया था। ट्रैफिक भी एक कारण था। कनॉट प्लेस जैसे व्यस्त इलाके में भीड़ से जाम लग सकता था।
यहां दो पक्ष हैं। एक तरफ बोरा के आरोप हैं। दूसरी तरफ पुलिस का बयान है। दोनों को हमने जस का तस रखा है।
‘रेजीम चेंज’ विवाद क्या है?
मार्च के बाद अब एक शब्द पर लड़ाई हो रही है — “रेजीम चेंज”। इसका मतलब है — सरकार बदलना। CJP ने सरकार बदलने की बात कही थी।
BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस पर हमला बोला। Zee News के मुताबिक उन्होंने कहा — “सत्ता जनादेश से मिलती है, अराजकता से नहीं।” उनका मतलब था कि सरकार चुनाव से बदलती है, सड़क पर हंगामे से नहीं।
कांग्रेस ने इसका जवाब दिया। TOI की खबर के मुताबिक कांग्रेस का कहना है — विपक्ष का काम है “विरोध करना, पर्दाफाश करना, हटाना”। यानी सरकार का विरोध करना विपक्ष का हक है।
राहुल गांधी ने भी बयान दिया। Zee की खबर के मुताबिक उन्होंने युवाओं की हिरासत को “कायरता का काम” कहा।
AAP ने भी शुक्रवार को अपना अलग तिरंगा मार्च निकाला। यह मार्च राष्ट्रपति भवन के पास हुआ। OdishaBytes की खबर के मुताबिक यह CJP के मार्च से अलग था।
आगे क्या होगा?
सबसे पहले आज का SEM कोर्ट का फैसला आएगा। वही तय करेगा कि दीपके को बांड पर छोड़ा जाता है या नहीं। फैसला आते ही हम यह खबर अपडेट करेंगे।
दूसरा — TOI की खबर है कि दिल्ली पुलिस ने निषेधाज्ञा तोड़ने पर कई FIR दर्ज की हैं। यानी यह मामला कोर्ट में आगे भी चल सकता है। FIR का मतलब है कि पुलिस ने अपराध दर्ज कर लिया है। अब जांच होगी।
तीसरा — CJP की एक और मांग है। पार्टी SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका चाहती है। SIR का मतलब है — मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण। साथ ही सौरव दास और रंका का नाम लेकर CBI जांच की मांग हो रही है।
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FAQs
क्या अभिजीत दीपके जेल में हैं?
नहीं। यह आपराधिक गिरफ्तारी नहीं है। उन्हें निवारक धाराओं में पकड़ा गया है। आज उन्हें SEM कोर्ट में पेश किया जाएगा। मजिस्ट्रेट तय करेगा कि शांति का बांड लेकर छोड़ा जाए या नहीं। फैसला लिखते समय नहीं आया था।
BNSS की धारा 126 और 170 का क्या मतलब है?
धारा 126 में मजिस्ट्रेट शांति बनाए रखने के लिए बांड मांग सकता है। धारा 170 में पुलिस आशंका के आधार पर पहले से गिरफ्तार कर सकती है। दोनों निवारक धाराएं हैं। ये पुरानी धारा 107 और 151 के नए नंबर हैं।
नेहा बोरा को क्यों छोड़ा गया?
उन्हें दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 के तहत औपचारिकताएं पूरी करके आधी रात को छोड़ दिया गया। उनका आरोप है कि पुलिस ने उन्हें 5 घंटे घुमाया और वकीलों से मिलने नहीं दिया। पुलिस कहती है कि हिरासत कानून-व्यवस्था के लिए थी।



