दिल्ली में आज शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में एक बड़ा प्रदर्शन होने वाला है। बुलाने वाली पार्टी का नाम है कॉक्रोच जनता पार्टी। इस लेख में हम सीधी भाषा में समझाएंगे — यह पार्टी क्या है, इसके संस्थापक अभिजीत दीपके कौन हैं, इसके दो नेता तिहाड़ क्यों गए, और आज का तिरंगा मार्च क्यों हो रहा है।
अपडेट: October 16, 2026, 11:00 AM IST
जल्दी पढ़ें
- कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके हैं। उन्होंने आज शाम 5 बजे सेंट्रल प्लेस, कनॉट प्लेस में ‘लेहरा दो तिरंगा’ मार्च बुलाया है।
- पार्टी के दो सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रंका 14 अक्टूबर से तिहाड़ जेल में हैं। उनके समर्थन में यह मार्च हो रहा है।
- NDMC ने सेंट्रल पार्क 16 और 17 अक्टूबर को बंद कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर को मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। पुलिस ने धारा 163 BNSS के तहत इकट्ठा होने पर रोक लगाई है।
कॉक्रोच जनता पार्टी क्या है?
कॉक्रोच जनता पार्टी एक छोटी राजनीतिक पार्टी है। इसका पूरा नाम है — Cockroach Janta Party, जिसे छोटा करके CJP कहते हैं। यह कोई बड़ी राष्ट्रीय पार्टी नहीं है। लेकिन पिछले एक हफ्ते में दिल्ली में इसने तीन बार बड़े प्रदर्शन किए, और हर बार खबर बनी।
पार्टी का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला तरीका है — सीधा प्रदर्शन, जगह-जगह मार्च, और सरकार के फैसलों के खिलाफ खुली आवाज। इस वजह से यह पार्टी दिल्ली पुलिस और मीडिया दोनों की नजर में है।
अभिजीत दीपके कौन हैं?
अभिजीत दीपके CJP के संस्थापक हैं। यानी यह पार्टी उन्होंने बनाई है। पार्टी के हर बड़े फैसले और हर बड़े प्रदर्शन के पीछे उन्हीं का हाथ होता है।
14 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रंका के जेल जाने के बाद दीपके ने ऐलान किया कि पार्टी उनके समर्थन में सड़क पर उतरेगी। आज शाम का ‘लेहरा दो तिरंगा’ मार्च उसी ऐलान का नतीजा है।
सौरव दास और आशुतोष रंका तिहाड़ क्यों गए?
ये दोनों CJP के सह-संयोजक हैं। यानी पार्टी में दीपके के बाद की दो बड़ी कुर्सियां इन्हीं के पास थीं। 14 अक्टूबर को इन्हें जंतर-मंतर में हुई एक घटना के मामले में गिरफ्तार किया गया और तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
मामले का ब्योरा हमने पहले ही कवर किया है — संक्षेप में, जंतर-मंतर में पार्टी के प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प हुई थी। ध्यान रहे, जंतर-मंतर अब प्रदर्शन की जगह नहीं रहा। दिल्ली प्रशासन ने इसे डी-नोटिफाई कर दिया है और प्रदर्शन के लिए तीन नई जगहें तय की हैं।
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आज शाम 5 बजे का तिरंगा मार्च क्या है?
मार्च का नाम है — ‘लेहरा दो तिरंगा’। CJP ने अपने समर्थकों से कहा है कि वे शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क पहुंचें और तिरंगा लहराएं। मकसद साफ है — जेल में बंद दोनों नेताओं के साथ एकजुटता दिखाना।
समय जानबूझकर चुना गया है। पार्क बंद होने का नोटिस 15 अक्टूबर को आया। हाईकोर्ट में सुनवाई 15 अक्टूबर को हुई। CJP को सब पता था, फिर भी मार्च का ऐलान जारी रहा। इसीलिए दिल्ली पुलिस आज शाम को ‘हाई रिस्क’ मानकर चल रही है।
सेंट्रल पार्क क्यों बंद है?
NDMC (नई दिल्ली नगरपालिका परिषद) ने 15 अक्टूबर के नोटिस से सेंट्रल पार्क 16 और 17 अक्टूबर को बंद कर दिया। कारण लिखा — “प्रशासनिक कारण”।
दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे इलाके से दूर रहें। पुलिस का कानूनी हथियार है — BNSS की धारा 163।
धारा 163 BNSS क्या है? सीधी भाषा में समझें
पहले इसका नाम था CrPC की धारा 144। अब नए कानून में यह धारा 163 है। मतलब बिल्कुल सीधा है:
पुलिस किसी इलाके में लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा सकती है। अगर कोई रोक तोड़कर इकट्ठा होता है, तो पुलिस उसे हिरासत में ले सकती है।
आज की स्थिति यही है — मार्च पर कोर्ट की रोक नहीं है, लेकिन पुलिस का इकट्ठा-होने-पर-प्रतिबंध है। दोनों की टक्कर शाम 5 बजे होगी।
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क्या यह धरना अनिश्चितकालीन हो जाएगा?
यही सबसे बड़ा सवाल है। खुफिया एजेंसियों की चेतावनी है — यह मार्च आज रात खत्म नहीं हो सकता। यह अनिश्चितकालीन धरने में बदल सकता है।
सोचकर देखें: अगर हजारों लोग झंडों के साथ आते हैं, और जिस पार्क में वे जाना चाहते हैं वह बंद है, और पुरानी प्रदर्शन वाली जगह (जंतर-मंतर) डी-नोटिफाई हो चुकी है — तो टकराव तय है। यही आज शाम की सबसे बड़ी चिंता है।
आगे क्या होगा?
तीन बातें तय नहीं हैं। पहली — हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार किया है, यह रोक की अनुमति नहीं है। दूसरी — SIR मामले में इंडिया ब्लॉक की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का नतीजा अभी साफ नहीं है। तीसरी — अगर आज धरना बैठ गया, तो दिल्ली पुलिस को फैसला लेना होगा: बलपूर्वक हटाए या संभालकर रखे।
एक बात और: कुछ मीडिया में राहुल गांधी के CEC-विरोधी मार्च का दावा भी आया है, लेकिन यह एक ही स्रोत की खबर है। इसकी पुष्टि होने तक इसे पक्का न मानें।
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सवाल-जवाब
क्या पुलिस आज का मार्च रोक सकती है, जबकि हाईकोर्ट ने रोक से इनकार किया है?
हां। हाईकोर्ट का इनकार मतलब अनुमति नहीं है। पुलिस धारा 163 BNSS के तहत अपने प्रतिबंध लागू कर सकती है और तोड़ने वालों को हिरासत में ले सकती है।
धारा 163 BNSS आम आदमी के लिए क्या मतलब रखती है?
सीधा मतलब — पुलिस तय इलाके में लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा सकती है। आज कनॉट प्लेस इलाके में यही रोक लागू है।
आज के बाद क्या होगा?
यह भीड़ के रवैये पर निर्भर है। अगर शाम का प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और खत्म हो गया, तो बात यहीं रुकेगी। अगर धरना बैठ गया, तो अगले कुछ दिन दिल्ली के लिए तनावपूर्ण रहेंगे।



