दिल्ली पुलिस ने INDIA ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट मार्च पर FIR दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि मार्च की इजाजत नहीं थी और नेताओं ने बैरिकेड तोड़े। उधर, राहुल गांधी समेत 11 नेताओं की याचिका में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने 14 खामियां बता दीं, जिससे सुनवाई टल गई।
Updated: October 13, 2026, 11:30 IST
Quick Read
- सोमवार (12 अक्टूबर) को INDIA ब्लॉक ने बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला; दिल्ली पुलिस ने बिना इजाजत मार्च और बैरिकेड तोड़ने पर FIR दर्ज की (Times Now)।
- राहुल गांधी समेत 11 नेताओं की रिट याचिका में SC रजिस्ट्री ने 14 खामियां बताईं — 220 रुपये फीस कम, 9 नेताओं के वकालतनामे गायब (HT, India TV)।
- सुनवाई मंगलवार को नहीं होगी; खामियां ठीक होने के बाद बुधवार को सुनवाई की मांग की गई है।
FIR क्यों दर्ज हुई
सोमवार दोपहर INDIA ब्लॉक के नेता कनॉट प्लेस के पास जुटे। वे बसों से बाराखंबा रोड चौराहे पहुंचे और वहां से सुप्रीम कोर्ट की तरफ पैदल मार्च शुरू किया। भगवान दास रोड पर पुलिस ने बैरिकेड लगा रखे थे। वहां मार्च रोक दिया गया।
Times Now के मुताबिक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव समेत कई नेता एक गाड़ी पर चढ़ गए और बैरिकेड पार करके आगे बढ़े। समर्थक सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाते रहे।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट तक मार्च की इजाजत दी ही नहीं गई थी। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने मिनी-ट्रक से बैरिकेड तोड़े। इसी आधार पर FIR दर्ज की गई है।
FIR यानी पुलिस में दर्ज लिखित शिकायत। FIR दर्ज होने का मतलब है कि अब पुलिस इस मामले की जांच करेगी।
एक और FIR भी दर्ज हुई है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) की शिकायत पर पुलिस ने AAP नेता अरविंद केजरीवाल और दूसरे नेताओं के खिलाफ FIR लिखी है। आरोप है कि उन्होंने गुरुद्वारा बंगला साहिब के पास हंगामा किया और भ्रामक वीडियो फैलाए (Deccan Herald, Moneycontrol)।
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याचिका में 14 खामियां क्या हैं
मार्च के बीच में ही राहुल गांधी की लीगल टीम सुप्रीम कोर्ट पहुंची और 11 नेताओं की साझा याचिका दायर की। पर सुनवाई से पहले ही रजिस्ट्री ने 14 खामियां बता दीं।
पहले समझें — रजिस्ट्री सुप्रीम कोर्ट का वह दफ्तर है जो हर याचिका के कागज जांचता है। कागज पूरे न हों तो केस सुनवाई के लिए आगे नहीं बढ़ता।
बताई गई खामियां (HT, India TV, Jansatta के मुताबिक):
- कोर्ट फीस 220 रुपये कम जमा हुई।
- 11 में से 9 याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे नहीं हैं — वकालतनामा वह कागज है जिससे नेता अपने वकील को केस लड़ने का लिखित अधिकार देते हैं।
- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की कॉपी धुंधली है।
- कुछ पन्ने गायब या अस्पष्ट हैं; छोटा फॉन्ट, पेज नंबर में गड़बड़ी।
- दो दस्तावेजों की रंगीन कॉपी नहीं लगाई गई; एक पुराने फैसले की कॉपी भी गायब है।
- रजिस्ट्री ने पूछा है कि दोनों चुनाव आयुक्तों को निजी पक्ष क्यों बनाया गया।
याचिकाकर्ताओं में राहुल गांधी और खड़गे के अलावा अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले, संजय राउत, सौगत रॉय, डी राजा, महुआ माझी, एमए बेबी और ईटी मोहम्मद बशीर हैं। दूसरी तरफ चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों को पक्ष बनाया गया है।
एक बात साफ रहे — ये खामियां सिर्फ कागजी हैं। याचिका के मुद्दे पर कोई फैसला नहीं हुआ है।
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याचिका में मांगा क्या गया है
याचिका में वोटर लिस्ट के SIR में गड़बड़ी का आरोप है। SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन — चुनाव आयोग वोटर लिस्ट की दोबारा गहरी जांच कर रहा है। विपक्ष इसे “वोट चोरी” कह रहा है। उनका आरोप है कि इस बहाने विरोधियों के वोट काटे जा रहे हैं।
Jansatta के मुताबिक याचिका में 10 मांगें हैं — SIR पर तुरंत रोक, वोटर लिस्ट का स्वतंत्र ऑडिट, चुनाव आयोग के अंदरूनी रिकॉर्ड सामने लाना। NDTV के मुताबिक पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की अगुवाई में जांच की मांग भी है। एक दलील यह भी दी गई कि पंजाब में 20.66 लाख नाम काटे गए, इसलिए तुरंत सुनवाई होनी चाहिए।
यह याचिका CJI सूर्यकांत के राहुल गांधी और खड़गे से मिलने से इनकार के एक दिन बाद दायर हुई। CJI ने कहा था कि कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले हैं — अपनी बात कोर्ट के जरिए रखें (HT)।
अब आगे क्या होगा
मंगलवार को सुनवाई नहीं होगी। राहुल गांधी की लीगल टीम ने खामियां ठीक करके बुधवार को सुनवाई की मांग की है (HT)।
मंगलवार को राहुल गांधी ने INDIA ब्लॉक के सांसदों, सामाजिक संगठनों और छात्र संगठनों को हाई-टी पर बुलाया है। दोपहर में INDIA ब्लॉक के नेताओं की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होगी (Times Now, PTI)।
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FAQs
FIR का मतलब क्या होता है?
FIR यानी फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट — पुलिस में दर्ज लिखित शिकायत। FIR दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की जांच शुरू करती है।
खामियां ठीक होने के बाद क्या होगा?
कागज पूरे होते ही याचिका सुनवाई के लिए लिस्ट होगी। वकीलों ने बुधवार को सुनवाई की मांग की है।
SIR क्या है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन — चुनाव आयोग वोटर लिस्ट की दोबारा गहरी जांच कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में वोट काटे जा रहे हैं, जिसे वह “वोट चोरी” कहता है।



