दिल्ली की एक अदालत ने CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रंका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है। बुधवार सुबह अदालत ने यह फैसला सुनाया। दोनों ने शनिवार को शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरा था, लेकिन मंगलवार को जंतर-मंतर में घुस गए। जंतर-मंतर अब प्रदर्शन की जगह नहीं रहा।
अपडेट: 14 अक्टूबर 2026, सुबह 10:30 बजे (IST)
Quick Read (ख़बर संक्षेप में)
- दिल्ली के स्पेशल एक्ज़ीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रंका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। दोनों अब तिहाड़ जेल में हैं।
- दोनों ने शनिवार को एक साल तक शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरा था। मंगलवार को वे जंतर-मंतर में घुस गए, जिसे दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को प्रदर्शन-स्थल से हटा दिया था।
- तीसरे CJP नेता अजिंक्य शिंदे को भी हिरासत में लिया गया। रिपोर्टों में उनकी स्थिति को लेकर अलग-अलग जानकारी है।
अदालत ने क्या फैसला दिया
बुधवार सुबह स्पेशल एक्ज़ीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई हुई। दिल्ली पुलिस ने अदालत से कहा कि दास और रंका ने शांति भंग की है और बॉन्ड की शर्तें तोड़ दी हैं, Times Now की 14 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक। पुलिस का यह भी कहना था कि दोनों ने खुलेआम लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने का आह्वान किया था।
अदालत ने पुलिस की बात मान ली। दोनों को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, और वे तिहाड़ जेल में हैं।
मामला मंगलवार की घटना से जुड़ा है। दास, रंका और शिंदे पुलिस की बैरिकेड तोड़कर जंतर-मंतर में घुस गए थे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के नारे लगाए, The Tribune की रिपोर्ट के अनुसार। जंतर-मंतर को प्रदर्शन-स्थल की सूची से हटाने का आदेश सिर्फ एक दिन पहले, 12 अक्टूबर को आया था।
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बॉन्ड टूटना असली मुद्दा क्यों है
मामला सिर्फ जंतर-मंतर में घुसने का नहीं है। पुलिस ने कई धाराएं लगाई हैं — घुसपैठ, निषेधाज्ञा का उल्लंघन, शांति बॉन्ड तोड़ना, और सरकारी कर्मचारी को काम करने से रोकना। The Tribune और The Week ने यह जानकारी दी है।
पूरी कहानी ऐसी है। CJP के नेता शनिवार को पहले हिरासत में लिए गए थे। वे दिल्ली में फ्लाइट से उतरे थे और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले थे, LiveLaw की रिपोर्ट बताती है। मजिस्ट्रेट की अदालत ने उन्हें छोड़ दिया था — लेकिन एक शर्त पर: एक साल तक शांति बनाए रखने का लिखित बॉन्ड भरना पड़ा।
मंगलवार को जंतर-मंतर में घुसकर उन्होंने यही बॉन्ड तोड़ दिया। पुलिस के पास हिरासत मांगने का यही आधार बना, और अदालत ने इसे स्वीकार कर लिया।
CJP का क्या कहना है
CJP की कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह ने इसका कड़ा विरोध किया है। उन्होंने X पर लिखा कि नेताओं को देर रात तक अपने वकीलों से मिलने नहीं दिया गया, The Week की रिपोर्ट के मुताबिक। सिंह के अनुसार, उन्हें सुबह 3 बजे एक प्राइवेट वैन में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन लाया गया। एक अलग बातचीत में उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ऊपरी आदेशों पर मनमानी कर रही है।
पार्टी के संस्थापक अभिजीत डिपके ने इससे भी तीखा बयान दिया। The Tribune के हवाले से उन्होंने X पर लिखा: आशु और सौरव को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उनका कसूर? जंतर-मंतर में तिरंगा लहराना। डिपके के मुताबिक, पार्टी का मकसद जंतर-मंतर को फिर से हासिल करना था। उन्होंने एक वीडियो साझा किया जिसमें CJP के सदस्य बंद गेट से कूदकर अंदर घुसते दिख रहे हैं, The Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार।
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अभी क्या साफ नहीं है
एक बात पर सावधानी जरूरी है। सभी खबरों में तीसरे नेता अजिंक्य शिंदे को लेकर एक जैसी जानकारी नहीं है। Times Now की रिपोर्ट में उन्हें भी दास और रंका के साथ हिरासत में भेजा बताया गया है। लेकिन LiveLaw कहता है कि शिंदे को निजी बॉन्ड पर छोड़ दिया गया। The Tribune के मुताबिक, उनकी जमानत की प्रक्रिया चल रही थी।
सही स्थिति यह है: दास और रंका 5 दिन तिहाड़ में रहेंगे। शिंदे की स्थिति को लेकर रिपोर्टें अलग हैं।
आगे क्या होगा
यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। यह पिछले कुछ दिनों की घटनाओं की कड़ी का नया हिस्सा है — 10 अक्टूबर को हिरासत, 12 अक्टूबर को इंडिया ब्लॉक का मार्च, और 13 अक्टूबर को उस मार्च पर FIR। CJP का अभियान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है, जिनके इस्तीफे की मांग को लेकर वोटर लिस्ट के SIR में गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं।
5 दिन की हिरासत 19 अक्टूबर को खत्म होगी। दिल्ली पुलिस ने तीन नए प्रदर्शन-स्थलों के लिए नई SOP जारी करने का वादा किया है, जो अभी तक नहीं आई है। जब तक वह SOP नहीं आती, दिल्ली में प्रदर्शन की योजना बनाने वाला हर कोई एक अनिश्चित स्थिति में है।
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FAQ
सौरव दास और आशुतोष रंका कौन हैं?
ये दोनों CJP (Cockroach Janta Party) के नेता हैं; दास पार्टी के प्रवक्ता हैं। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है, वोटर लिस्ट के SIR में गड़बड़ी के आरोप लगाकर।
शांति बॉन्ड क्या होता है?
यह अदालत या पुलिस को दिया गया लिखित वादा होता है कि व्यक्ति एक तय समय तक शांति बनाए रखेगा। दास और रंका ने शनिवार को एक साल तक शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरा था, और इसे तोड़ने पर अदालत ने हिरासत का आदेश दिया।
क्या जंतर-मंतर पर अभी भी प्रदर्शन हो सकता है?
पहले जैसा नहीं। दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को प्रदर्शन-स्थल की सूची से हटा दिया और नई जगहें तय की हैं: रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और CBD ग्राउंड। अब जंतर-मंतर में प्रदर्शन के लिए घुसने पर वही धाराएं लग सकती हैं, जो CJP नेताओं पर लगी हैं।



