INDIA ब्लॉक आज, 31 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक सांकेतिक जन महाभियोग करेगा। बारिश के कारण यह कार्यक्रम एक दिन टल गया था। अब यह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर के लॉन में होगा।
Updated: October 31, 2026, 10:00 AM IST
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- INDIA ब्लॉक आज दोपहर में सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सांकेतिक जन महाभियोग का कार्यक्रम करेगा।
- यह कार्यक्रम 30 अक्टूबर को होना था, पर दिल्ली में लगातार बारिश के कारण इसे 31 अक्टूबर तक टाल दिया गया।
- यह कोई असली कानूनी कार्रवाई नहीं है। इससे मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटाया जा सकता।
आज क्या होगा
कार्यक्रम दिल्ली में 10, राजाजी मार्ग पर होगा। यह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का सरकारी घर है। बिजनेस स्टैंडर्ड और द टेलीग्राफ की खबरों के अनुसार, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा कि कार्यक्रम 31 अक्टूबर को दोपहर में होगा।
कार्यक्रम संसद की नकली कार्यवाही जैसा होगा। समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से खबरों में कहा गया है कि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार इसकी अध्यक्षता करेंगी। खड़गे सांकेतिक प्रस्ताव रखेंगे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी आखिर में अपनी बात कहेंगे। इसके बाद प्रस्ताव पर सांकेतिक वोट होगा।
राहुल गांधी ने 30 अक्टूबर को खड़गे के घर के बाहर पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि सबकी सहमति से कार्यक्रम टाला गया है। बारिश में बुजुर्ग नेताओं को बैठना मुश्किल होता। इसलिए वही कार्यक्रम अगले दिन करने का फैसला हुआ।
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बारिश ने कार्यक्रम क्यों टाला
दिल्ली में 30 अक्टूबर को लगातार बारिश हुई। कार्यक्रम खुले लॉन में होना था। गीले मैदान में लंबा कार्यक्रम करना आसान नहीं था।
यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) ने लिखा कि बारिश और खराब मौसम ने तैयारी में रुकावट डाली। इसी वजह से विपक्षी गठबंधन ने कार्यक्रम को एक दिन आगे बढ़ा दिया।
एक बात का ध्यान रखें। स्रोतों में कार्यक्रम के सही समय को लेकर फर्क है, इसलिए इस पोस्ट में सिर्फ दोपहर कहा गया है।
विपक्ष का आरोप क्या है
INDIA ब्लॉक का आरोप है कि चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट के काम में गड़बड़ी की है। उनका कहना है कि सही वोटरों के नाम काटे गए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि वोटर लिस्ट बदलने की प्रक्रिया में नियमों का ठीक से पालन नहीं हुआ।
इस पूरी बहस के बीच में एसआईआर है। एसआईआर का मतलब है वोटर लिस्ट की विशेष गहन जांच। आसान भाषा में कहें तो यह वोटर लिस्ट को जांचने और सुधारने का काम है। इसमें नाम जोड़े जाते हैं, गलत नाम हटाए जाते हैं और पते जैसी जानकारी ठीक की जाती है।
एसआईआर में चुनाव कर्मचारी घर-घर जाकर हर नाम की जांच करते हैं। जो लोग मर चुके हैं या कहीं और चले गए हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। एक ही नाम दो बार हो तो उसे ठीक किया जाता है। जो सही वोटर छूट गए हैं, उनके नाम जोड़े जाते हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि इससे “एक व्यक्ति, एक वोट” का नियम मजबूत होता है। विपक्ष का कहना है कि तेज़ी और सख्त कागज़ जांच में सही वोटर भी गलती से कट सकते हैं।
विपक्ष का कहना है कि इस जांच के नाम पर वोटरों के अधिकार को खतरा हुआ है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है।
यह साफ करना जरूरी है कि ये आरोप विपक्ष के हैं। इन खबरों में चुनाव आयोग का जवाब नहीं मिला है। इसलिए इन्हें साबित तथ्य की तरह नहीं पढ़ा जाना चाहिए। ये विपक्ष का पक्ष है।
असली महाभियोग से यह कैसे अलग है
महाभियोग एक भारी शब्द है। असली महाभियोग संसद की एक औपचारिक प्रक्रिया होती है। उससे किसी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति को हटाया जा सकता है।
आज का कार्यक्रम वैसा नहीं है। यूएनआई ने साफ लिखा है कि यह कोई संवैधानिक या कानूनी कार्यवाही नहीं है। इससे मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटाया जा सकता।
तो फिर यह कार्यक्रम क्यों हो रहा है? विपक्ष इसे जनता के सामने विरोध जताने का तरीका बता रहा है। वह चुनाव आयोग के काम पर सवाल उठाना चाहता है। वह अपनी बात जनता तक पहुंचाना चाहता है।
कांग्रेस ने पहले यह भी कहा था कि उसे दूसरे स्थानों पर यह कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं मिली। द इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार, कांग्रेस ने मंगलवार को यह दावा किया था। इसके बाद कार्यक्रम खड़गे के घर पर रखने का फैसला हुआ।
30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ
30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में एसआईआर से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिका में कहा गया कि एक सीट पर 32 फॉर्म 7 दाखिल किए गए। फॉर्म 7 वह फॉर्म है जिससे किसी नाम को वोटर लिस्ट से हटाने की मांग की जाती है। आसान भाषा में यह एक आपत्ति फॉर्म है। चुनाव आयोग के वकील ने कोर्ट को बताया कि इन फॉर्मों की जांच की गई, वे गलत पाए गए और उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह तथ्यों की जांच करे, ज़रूरी सुधार करे और अपनी रिपोर्ट कोर्ट को दे। केरल में एसआईआर का काम पूरा हो चुका है, इसलिए वहां समय बढ़ाने से इनकार किया गया। छत्तीसगढ़ के लिए आयोग को चार हफ्ते का समय दिया गया।
आगे क्या होगा
आज के कार्यक्रम के बाद विपक्ष की अगली बड़ी कार्रवाई 1 नवंबर को होगी। द वीक और बिजनेस स्टैंडर्ड की खबरों के अनुसार, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली होगी। इसे ‘चलो दिल्ली’ मार्च कहा गया है।
1 नवंबर को “चलो दिल्ली” मार्च दिल्ली के मिंटो रोड–कनॉट प्लेस चौराहे से रामलीला मैदान तक जाएगा। राहुल गांधी ने दलों, नागरिक समूहों, पत्रकारों और आम लोगों से इस मार्च में शामिल होने को कहा है।
वोटरों के लिए इसका मतलब क्या है
वोटर के लिए सीधा सवाल यही है कि उसका नाम लिस्ट में है या नहीं। अगर नाम लिस्ट में है तो चुनाव से पहले उसे जांच लें। अगर नाम नहीं है तो चुनाव आयोग के पास अपनी बात रखी जा सकती है। 30 अक्टूबर की सुनवाई में भी यही बात सामने आई कि गलती से छूटे लोग अपने कागज़ लेकर आयोग के पास जा सकते हैं।
समय-सारणी: गुरुवार, 29 अक्टूबर — INDIA ब्लॉक के नेताओं ने कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए बैठक की। शुक्रवार, 30 अक्टूबर — बारिश के कारण कार्यक्रम टला; राहुल गांधी ने टालने की घोषणा की। शनिवार, 31 अक्टूबर — दोपहर, 10 राजाजी मार्ग पर सांकेतिक जन महाभियोग। रविवार, 1 नवंबर — रामलीला मैदान में ‘चलो दिल्ली’ मार्च और रैली।
आज दोपहर के कार्यक्रम में क्या कहा जाएगा, और उस पर चुनाव आयोग या सरकार की ओर से क्या जवाब आता है, यह देखने वाली बात होगी। 1 नवंबर की रैली से पहले यह कार्यक्रम विपक्ष के अभियान का अगला कदम है।
FAQ
जन महाभियोग क्या है?
यह एक सांकेतिक कार्यक्रम है। इसमें विपक्षी नेता संसद जैसी नकली कार्यवाही करेंगे। वे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव रखेंगे और उस पर वोट करेंगे। यह असली कानूनी कार्रवाई नहीं है।
क्या इस कार्यक्रम से सीईसी को हटाया जा सकता है?
नहीं। यूएनआई ने साफ लिखा है कि यह कोई संवैधानिक या कानूनी कार्यवाही नहीं है। इससे मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटाया जा सकता।
कार्यक्रम कब और कहां होगा?
31 अक्टूबर को दोपहर में। जगह है 10, राजाजी मार्ग, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का घर, दिल्ली। इसके अगले दिन, 1 नवंबर को रामलीला मैदान में रैली होगी।



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