दीवाली (लक्ष्मी पूजा) इस बार रविवार, 8 नवंबर को है। दिल्ली में सबसे शुभ मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 बजे तक रहेगा। यहाँ जानें 5 दिन का पूरा कैलेंडर, अमावस्या का समय और पूजा की तैयारी।
अपडेट: 23 अक्टूबर, 2026, सुबह 10:30
सारांश
- लक्ष्मी पूजा: रविवार, 8 नवंबर — हर राज्य में यही तारीख है।
- दिल्ली मुहूर्त: वृषभ लग्न शाम 5:54 से 7:50 बजे तक; प्रदोष काल शाम 5:31 से 8:09 बजे तक।
- 5 दिन का क्रम: धनतेरस 6 नवंबर → छोटी दीवाली 7 नवंबर → दीवाली 8 नवंबर → गोवर्धन पूजा 10 नवंबर → भाई दूज 11 नवंबर।
दीवाली का सबसे बड़ा दिन — लक्ष्मी पूजा — इस बार रविवार, 8 नवंबर को पड़ेगा। यह वही शाम है जब घरों में दीये जलते हैं और माता लक्ष्मी का स्वागत होता है। दिल्ली में पूजा का सबसे शुभ समय शाम 5:54 से 7:50 बजे तक रहेगा। अगर आप पूजा की तैयारी कर रहे हैं, तो यह गाइड आपके काम आएगी: सही तारीख, सही मुहूर्त और 5 दिन का पूरा कैलेंडर।
8 नवंबर ही क्यों? तारीख का हिसाब
लक्ष्मी पूजा हमेशा अमावस्या की रात को होती है। अमावस्या यानी वह रात जब आसमान में चाँद नहीं दिखता। इस बार अमावस्या 8 नवंबर को सुबह 11:28 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। पूजा हमेशा सूर्यास्त के बाद होती है। इसलिए सिर्फ 8 नवंबर की शाम को पूजा बनती है — 9 तारीख की शाम को अमावस्या नहीं रहेगी।
सीधे शब्दों में: दीवाली की तारीख चाँद के हिसाब से तय होती है, कैलेंडर के हिसाब से नहीं। इसीलिए हर साल तारीख बदलती है। इस बार सही तारीख रविवार, 8 नवंबर है।
दिल्ली का मुहूर्त
मुहूर्त का मतलब है — पूजा के लिए सबसे शुभ समय। दिल्ली में इस बार दो समय खास हैं। पहला, वृषभ लग्न: शाम 5:54 से 7:50 बजे तक। यही सबसे अच्छा समय माना जाता है। दूसरा, प्रदोष काल: शाम 5:31 से 8:09 बजे तक। प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास का समय होता है, जब शाम की पूजा की जाती है।
अगर आप दिल्ली से बाहर हैं, तो समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है। अपने शहर का सही मुहूर्त स्थानीय पंचांग में जरूर देख लें। लेकिन 8 नवंबर की शाम — यही पूजा का दिन है।
मुहूर्त क्यों ज़रूरी है
बहुत से लोग पूछते हैं — मुहूर्त में ही पूजा क्यों? परंपरा के अनुसार वृषभ लग्न एक स्थिर लग्न माना जाता है। मान्यता है कि इस समय की गई पूजा से माता लक्ष्मी घर में स्थिर होकर बैठती हैं — यानी सुख-समृद्धि टिकती है। यही कारण है कि पंडित और पंचांग वृषभ लग्न को लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे अच्छा बताते हैं। यह आस्था का विषय है, पर करोड़ों परिवार इसी हिसाब से पूजा करते हैं।
5 दिन का पूरा कैलेंडर
दीवाली सिर्फ एक दिन नहीं, 5 दिन का त्योहार है। पूरा क्रम इस तरह है:
| दिन | तारीख | त्योहार |
|---|---|---|
| शुक्रवार | 6 नवंबर | धनतेरस |
| शनिवार | 7 नवंबर | छोटी दीवाली (नरक चतुर्दशी) |
| रविवार | 8 नवंबर | दीवाली — लक्ष्मी पूजा |
| मंगलवार | 10 नवंबर | गोवर्धन पूजा |
| बुधवार | 11 नवंबर | भाई दूज |
धनतेरस पर सोना-चाँदी और बर्तन खरीदने की परंपरा है। छोटी दीवाली को घर की सफाई और दीये जलाने का दिन माना जाता है। 8 नवंबर की शाम लक्ष्मी पूजा का मुख्य दिन है। गोवर्धन पूजा पर गोवर्धन पर्वत की पूजा होती है, और भाई दूज पर बहनें भाइयों को तिलक लगाती हैं।
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पूजा की तैयारी कब शुरू करें
पूजा से 2-3 दिन पहले तैयारी शुरू कर दें। दीये, तेल या घी, रुई की बत्ती, अगरबत्ती, फूल (खासकर कमल या गेंदा), मिठाई, फल, सिक्के और कलश — ये सब पहले से जुटा लें। दीवाली से एक दिन पहले दीयों को धोकर सुखा लें, ताकि पूजा वाले दिन जल्दबाजी न हो। लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या तस्वीर साफ करके पूजा स्थान पर रखें। घर की सफाई धनतेरस से पहले पूरी कर लें — परंपरा कहती है कि साफ घर में ही लक्ष्मी आती हैं।
पूजा में क्या-क्या चाहिए
- दीये और बत्ती: मिट्टी के दीये, तेल या घी, रुई की बत्ती
- फूल और माला: कमल, गेंदा या गुलाब के फूल
- मिठाई और फल: पूजा के बाद प्रसाद के लिए
- सिक्के और कलश: कलश में पानी, ऊपर नारियल और आम के पत्ते
- अन्य: अगरबत्ती, धूप, कुमकुम, चावल, सुपारी, पान के पत्ते
पूजा शाम के मुहूर्त में करें — दिल्ली में 5:54 से 7:50 बजे के बीच। पहले गणेश जी की पूजा होती है, फिर माता लक्ष्मी की। पूजा के बाद घर के हर कोने में दीये जलाएँ। यही दीवाली की असली रौनक है।
धनतेरस से भाई दूज: हर दिन का मतलब
धनतेरस (6 नवंबर): धन और स्वास्थ्य का दिन। इस दिन सोना, चाँदी, बर्तन या नई चीज़ें खरीदना शुभ माना जाता है। शाम को धन्वंतरि और कुबेर की पूजा होती है।
छोटी दीवाली (7 नवंबर): इसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन घर की गहरी सफाई, कूड़ा-कचरा बाहर निकालना और शाम को दीये जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था।
दीवाली — लक्ष्मी पूजा (8 नवंबर): मुख्य दिन। शाम के मुहूर्त में माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा। घर के हर कोने में दीये, दरवाज़े पर रंगोली और तोरण।
गोवर्धन पूजा (10 नवंबर): इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा होती है। कई जगह अन्नकूट बनता है — यानी तरह-तरह के पकवान एक साथ भगवान को चढ़ाए जाते हैं।
भाई दूज (11 नवंबर): पाँच दिन के त्योहार का आखिरी दिन। बहनें भाइयों को तिलक लगाती हैं और भाई बहनों को उपहार देते हैं।
लक्ष्मी पूजा की विधि
- चरण 1: पूजा स्थान साफ करें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ। लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या तस्वीर रखें।
- चरण 2: कलश स्थापित करें — कलश में पानी भरें, ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें।
- चरण 3: दीये जलाएँ। घी का दीया सबसे शुभ माना जाता है।
- चरण 4: पहले गणेश जी की पूजा करें — फूल, चावल, मिठाई चढ़ाएँ।
- चरण 5: फिर माता लक्ष्मी की पूजा करें — कमल के फूल, सिक्के, कौड़ी और मिठाई अर्पित करें।
- चरण 6: आरती करें और प्रसाद बाँटें।
पूजा हमेशा शाम के मुहूर्त में करें। जल्दबाजी में पूजा न करें — शांति से बैठकर, पूरे मन से पूजा करना ही असली मतलब है।
दीये जलाते समय सुरक्षा
दीवाली की रात हर साल आग लगने की खबरें आती हैं। कुछ आसान नियम अपना लें: दीये पर्दों, कागज़ और लकड़ी के फर्नीचर से दूर रखें। जलते दीये को कभी अकेला न छोड़ें — खासकर बच्चों और पालतू जानवरों के आसपास। तेल के दीये की जगह कई परिवार अब मिट्टी के दीयों में LED बत्ती इस्तेमाल करते हैं — रौनक वही, खतरा कम। पटाखे जलाते समय बाल्टी में पानी जरूर रखें।
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सामान्य प्रश्न
लक्ष्मी पूजा 2026 में कब है?
रविवार, 8 नवंबर 2026 को। यही दीवाली का मुख्य दिन है। अमावस्या 8 नवंबर सुबह 11:28 से 9 नवंबर दोपहर 12:31 तक रहेगी।
दिल्ली में पूजा का सबसे शुभ समय क्या है?
वृषभ लग्न: शाम 5:54 से 7:50 बजे तक। प्रदोष काल शाम 5:31 से 8:09 बजे तक रहेगा। दूसरे शहरों में समय थोड़ा अलग हो सकता है।
दीवाली के 5 दिन कौन-कौन से हैं?
धनतेरस (6 नवंबर), छोटी दीवाली (7 नवंबर), दीवाली-लक्ष्मी पूजा (8 नवंबर), गोवर्धन पूजा (10 नवंबर) और भाई दूज (11 नवंबर)।
